
तेजस्वी यादव ने प्रदर्शन में कहा कि भाईचार खत्म किया जा रहा है, लोकतंत्र खत्म हो रहा है। हमारी पार्टी आरजेडी, हमारे नेता लालू प्रसाद यादव यहां आपका साथ देने, हम सब आपके हाथ मजबूत करने आए हैं। किसी भी कीमत पर, चाहे सत्ता रहे या न रहे।
Lalu Yadav and Tejashwi join AIMPLB protest against Waqf Amendment Bill in Patna
वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा आज देशव्यापी ‘आंदोलन’ बिहार की राजधानी पटना से शुरू हो गया है। पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर मुस्लिम संगठनों जमा हुए हैं। बड़ी संख्या में इस विरोध-प्रदर्शन में लोग शामिल हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव और तेजस्वी यादव भी पहुंचे।
तेजस्वी यादव ने प्रदर्शन में कहा कि भाईचार खत्म किया जा रहा है, लोकतंत्र खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी आरजेडी, हमारे नेता लालू प्रसाद यादव यहां आपका साथ देने, हम सब आपके हाथ मजबूत करने आए हैं। किसी भी कीमत पर, चाहे सत्ता रहे या न रहे, हमने सदन, विधानसभा और विधान परिषद में इस गैर संवैधानिक, अलोकतांत्रिक बिल का विरोध किया है। आज हमने कार्य स्थगन प्रस्ताव लाकर इस पर चर्चा की मांग की, लेकिन सदन स्थगित कर दिया गया। हम आपको बताना चाहते हैं कि हम इसमें आपके साथ खड़े हैं। हमारी कोशिश है कि यह बिल किसी भी कीमत पर पास न हो।”
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस विधेयक को असंवैधानिक करार दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की थी, जिसमें पहले चरण के तहत क्रमशः 26 और 29 मार्च को पटना और विजयवाड़ा में राज्य विधानसभाओं के सामने बड़े पैमाने पर धरना देने की योजना बनाई गई।
वक्फ बिल का AIMPLB क्यों कर रहा विरोध?
AIMPLB और मुस्लिम समुदाय का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल मुसलमानों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा है। इनका कहना है कि वक्फ संपत्तियां सरकारी संपत्ति नहीं बल्कि धार्मिक ट्रस्ट हैं और यह बिल वक्फ की स्वायत्तता पर गंभीर हमला है।
मुस्लिम समुदाय की ओर से कहा जा रहा है कि वक्फ संशोधन बिल मुस्लिम संपत्तियों और उनकी संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने के लिए लाया गया है। यह विधेयक 1995 के मौजूदा वक्फ अधिनियम में व्यापक बदलाव करता है। इससे सरकार को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का अधिक अधिकार मिल जाता है।